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कपालिका तीन अंकों का नाटक है। जंगल में श्मशान के निकट एक अंधेरी रात में आश्रय की तलाश में भटकता एक युवा दंपति एक ऐसी स्त्री से मिलता है जो समाज की सीमाओं के बाहर अकेली रहती है — कपालिका।धीरे-धीरे उसके अतीत की परतें खुलती हैं — विश्वासघात, अपमान और बहिष्कार से निर्मित एक जीवन। एक भटकते तांत्रिक के आगमन से उसके भीतर दबे हुए भाव जाग उठते हैं और घटनाओं की एक ऐसी श्रृंखला शुरू होती है जो अंततः उन्माद और एक विचित्र सामाजिक रूपांतरण की ओर ले जाती है।कपालिका नाटक में निष्कपटता, प्रतिशोध, इच्छा, एकाकीपन और सामाजिक हाशिये के बीच की त्रासद तनावों को रूपायित किया गया है। यह मार्मिक नाट्यकथा समाज और उसके हाशिये के संबंधों को उजागर करती है। इस द्विभाषी संस्करण में नाटक का हिंदी मूल पाठ तथा लेखक द्वारा किया गया अंग्रेज़ी अनुवाद प्रस्तुत है।

आशीष दत्ता
Authorआशीष दत्ता पेशे से एक इंजीनियर होने के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी के साहित्यकार हैं। आशीष दत्ता की रचनाएँ मानवीय अनुभवों के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक आयामों को गहराई से रेखांकित करती हैं। उनका प्रथम काव्य संग्रह ‘यौवन की दहलीज़ पर’ हाल ही में संपर्क प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हुआ है। उनका द्विभाषी नाटक ‘कपालिका’ (हिंदी एवं अंग्रेजी) तथा प्रथम अंग्रेजी काव्य संग्रह ‘The Bird Flown Away and other poems’ भी शीघ्र ही संपर्क प्रकाशन द्वारा प्रकाशित होने वाले हैं। एक कुशल अनुवादक के रूप में उन्होंने रॉबर्ट वाल्सर, नाज़िम हिक़मत और डेनिश नाटककार एस्ट्रिड सालबैक जैसे विश्वप्रसिद्ध कवियों, नाटककारों और लेखकों की कालजयी रचनाओं का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद किया है।
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